"उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: NDA उम्मीदवार बने CP Radhakrishnan, विपक्ष की रणनीति पर सबकी नजर"
सी.पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति पद के लिए किया नामांकन
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2025 – भारतीय राजनीति में आज एक ऐतिहासिक दिन दर्ज हो गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से सी.पी. राधाकृष्णन ने संसद भवन में उपराष्ट्रपति पद के लिए आधिकारिक रूप से नामांकन दाखिल किया। संसद परिसर गहमागहमी और राजनीतिक हलचलों का केंद्र बना रहा, जहाँ सत्ता पक्ष के लगभग सभी बड़े चेहरे मौजूद थे।
नामांकन का पूरा घटनाक्रम
सुबह लगभग 11 बजे सी.पी. राधाकृष्णन संसद भवन पहुँचे। उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, कई केंद्रीय मंत्री और एनडीए के सहयोगी दलों के नेता भी शामिल थे। यह नामांकन एक तरह से भाजपा और एनडीए की एकजुटता का प्रदर्शन भी रहा।
राज्यसभा सचिवालय में नामांकन दाखिल करते समय पूरे माहौल में अनुशासन और औपचारिकता दिखी। राधाकृष्णन ने नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर किए और औपचारिक घोषणा के साथ ही वे देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद की दौड़ में आधिकारिक रूप से शामिल हो गए।
कौन हैं सी.पी. राधाकृष्णन?
सी.पी. राधाकृष्णन दक्षिण भारत के जाने-माने नेता हैं।
वे तमिलनाडु के कोयंबटूर से ताल्लुक रखते हैं।
भाजपा से लंबे समय से जुड़े रहे और 1998 व 1999 में कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए।
दक्षिण भारत में भाजपा के संगठन को खड़ा करने में उनका अहम योगदान रहा है।
पार्टी के भीतर उन्हें ईमानदार और सरल स्वभाव वाला नेता माना जाता है।
वर्तमान में वे त्रिपुरा के राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं।
उनकी पहचान एक साफ-सुथरे और विकासोन्मुखी नेता की रही है। राजनीति में उनकी यात्रा संघर्षों से भरी रही, लेकिन उन्होंने हमेशा संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ बनाए रखी।
राजनीतिक महत्व और रणनीति
उपराष्ट्रपति का पद भारतीय लोकतंत्र में बेहद महत्वपूर्ण है। यह न केवल देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है बल्कि राज्यसभा के सभापति का दायित्व भी इसी पद पर आसीन व्यक्ति निभाते हैं। ऐसे में सदन की कार्यवाही को संतुलित और सुचारू रूप से चलाना उपराष्ट्रपति की सबसे अहम भूमिका होती है।
भाजपा और एनडीए द्वारा दक्षिण भारत से आने वाले नेता को उम्मीदवार बनाना केवल एक औपचारिक फैसला नहीं है। इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति है। भाजपा लंबे समय से दक्षिण भारत में अपने आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राधाकृष्णन का नामांकन इसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
विपक्ष की स्थिति
उधर विपक्षी गठबंधन (INDIA Bloc) भी इस चुनाव को लेकर सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष जल्द ही अपने उम्मीदवार का नाम घोषित करेगा। कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दल इस कोशिश में हैं कि एक संयुक्त उम्मीदवार उतारकर चुनाव को दिलचस्प बनाया जाए।
हालाँकि, संसदीय संख्या बल को देखते हुए यह साफ है कि एनडीए उम्मीदवार को भारी बढ़त हासिल है। भाजपा और उसके सहयोगियों की ताकत इतनी है कि राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। फिर भी, विपक्ष की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने से राजनीतिक मुकाबले में धार जरूर आ जाएगी।
ऐतिहासिक दृष्टि से महत्व
अगर राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो यह दक्षिण भारत की राजनीति के लिए ऐतिहासिक क्षण होगा। अब तक देश के इस संवैधानिक पद पर ज्यादातर उत्तर भारत और मध्य भारत के नेताओं का वर्चस्व रहा है। दक्षिण भारत से किसी बड़े नेता का इस पद पर पहुँचना एक संतुलन की दृष्टि से भी अहम माना जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस कदम के जरिए आने वाले लोकसभा चुनावों में तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है।
चुनाव की प्रक्रिया
चुनाव आयोग के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद का चुनाव अगले महीने आयोजित होगा। संसद के दोनों सदनों के सांसद इस चुनाव में मतदान करेंगे। मतदान और मतगणना एक ही दिन पूरी कर ली जाएगी। नतीजे घोषित होने के बाद शपथग्रहण समारोह आयोजित होगा।
जनता और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
सी.पी. राधाकृष्णन के नामांकन के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। भाजपा समर्थकों ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया, जबकि विपक्षी समर्थकों ने इसे मात्र एक राजनीतिक रणनीति करार दिया। ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर "CP Radhakrishnan" और "Vice President Election" जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
निष्कर्ष
सी.पी. राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं बल्कि आने वाले समय की राजनीति का संकेत भी है। यह भाजपा की ओर से दक्षिण भारत को दिया गया बड़ा संदेश है और विपक्ष के लिए एक चुनौती भी। अब सभी की निगाहें आगामी चुनाव और उसके नतीजों पर टिकी हैं।
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