गणेश चतुर्थी 2025: तारीख, पूजा मुहूर्त, महत्व, इतिहास और विसर्जन की पूरी जानकारी


 लेखक :- सुकेश कौरव 


नमस्कार दोस्तों, आपका स्वागत है हमारे खास कार्यक्रम में। आज हम बात करने जा रहे हैं भारत के सबसे बड़े और लोकप्रिय त्योहारों में से एक, गणेश चतुर्थी 2025 की। यह सिर्फ एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आस्था, उत्साह और एकता का प्रतीक भी है। हर साल की तरह इस साल भी गणपति बप्पा का आगमन भक्तों के लिए ढेर सारी खुशियाँ और उमंग लेकर आने वाला है।



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🔹 गणेश चतुर्थी 2025 की तिथि


इस साल गणेश चतुर्थी 2025, रविवार 31 अगस्त को मनाई जाएगी।

पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह से ही प्रारंभ होगी और भगवान गणेश जी का स्वागत पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ किया जाएगा।


👉 माना जाता है कि इस दिन गणेश जी का जन्म हुआ था और इसलिए इस दिन गणपति जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।



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🔹 पूजा का शुभ मुहूर्त


इस बार गणेश जी की स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त इस प्रकार रहेगा –


सुबह: 11:20 बजे से 01:45 बजे तक


शाम: 04:30 बजे से 06:00 बजे तक



यानी कि भक्त इन समयों में गणेश जी की स्थापना करेंगे तो उनके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहेगी।



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🔹 धार्मिक महत्व


भगवान गणेश को विघ्नहर्ता यानी सभी बाधाओं को दूर करने वाला और सुखकर्ता यानी सुख देने वाला देवता माना जाता है।

किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले गणपति जी का नाम लिया जाता है ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो।


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी बुद्धि, विवेक और समृद्धि के देवता हैं। इसीलिए गणेश चतुर्थी पर उनकी स्थापना करने से घर में खुशहाली और सकारात्मकता आती है।



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🔹 गणेश उत्सव का इतिहास


दोस्तों, अगर हम इतिहास की बात करें तो गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाने की परंपरा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शुरू की थी।

उन दिनों अंग्रेजों के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए उन्होंने गणेश उत्सव को सामूहिक रूप से मनाने की शुरुआत की।


आज भी वही परंपरा जारी है। इसीलिए गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण पर्व बन चुका है।



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🔹 गणेश उत्सव कैसे मनाया जाता है?


गणेश उत्सव कुल 10 दिनों तक चलता है।


पहले दिन गणपति बप्पा की प्रतिमा को घर या पंडाल में स्थापित किया जाता है।


रोज़ाना सुबह और शाम आरती, भजन और पूजा होती है।


भक्तजन गणपति जी को मोदक और अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं।


जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य, संगीत और नाटक आयोजित किए जाते हैं।


दसवें दिन धूमधाम से गणपति विसर्जन किया जाता है।




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🔹 आधुनिक गणेश उत्सव


समय के साथ गणेश उत्सव में आधुनिकता भी जुड़ गई है।


आजकल कई जगहों पर थीम बेस्ड पंडाल सजाए जाते हैं, जैसे ऐतिहासिक धरोहरों पर आधारित, धार्मिक कथाओं पर आधारित या फिर किसी सामाजिक मुद्दे को उजागर करने वाले।


डिजिटल युग में कई मंदिर और पंडाल लाइव स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन दर्शन की सुविधा भी देते हैं।


Eco-Friendly Ganesh Idols का प्रचलन बढ़ रहा है। ये मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी होती हैं, ताकि जल प्रदूषण और पर्यावरण को नुकसान न हो।




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🔹 गणेश विसर्जन 2025


गणेश चतुर्थी के दसवें दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर बप्पा का विसर्जन किया जाता है।

इस साल विसर्जन की तिथि है 10 सितंबर 2025, बुधवार।

इस दिन भक्त बप्पा को विदाई देते हुए कहते हैं –

“गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ”



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🔹 गणेश चतुर्थी 2025 की खासियत


1. इस साल रविवार को पड़ने के कारण पूरे देश में छुट्टी और वीकेंड का माहौल रहेगा, जिससे उत्सव का आनंद और भी बढ़ जाएगा।



2. पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कई जगहों पर मिट्टी के गणेश बनाने की विशेष तैयारी की गई है।



3. मुंबई, पुणे, हैदराबाद, नागपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में भव्य पंडालों की झलक दुनिया भर से लोग देखने आते हैं।



4. गणेश चतुर्थी सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब पूरे भारत और विदेशों में बसे भारतीयों के बीच भी यह पर्व बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।





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🔹 भक्ति और एकता का संदेश


गणेश चतुर्थी हमें सिर्फ पूजा-पाठ करना नहीं सिखाती, बल्कि यह पर्व हमें एकता, भाईचारा और पर्यावरण प्रेम का संदेश भी देती है।

इस पर्व पर लोग जाति, धर्म और भाषा की दीवारों को तोड़कर एक साथ जुड़ते हैं और भक्ति का रंग हर जगह बिखर जाता है।



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🎯 निष्कर्ष


दोस्तों, गणेश चतुर्थी 2025 सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपराओं का उत्सव है।

इस साल भी गणपति बप्पा का आगमन भक्ति, उल्लास और प्रेम के साथ होगा।


👉 आप भी इस बार बप्पा का स्वागत उत्साह से करें, पूजा में शामिल हों और साथ ही ध्यान रखें कि Eco-Friendly तरीके से गणेश उत्सव मनाना ही सच्ची श्रद्धा है।


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